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Sunday, July 29, 2018

बच्चों के निजी डाटा की सुरक्षा के लिए श्रीकृष्ण समिति का कड़े प्रावधानों का सुझाव

नईदिल्ली। सूचनाओं की गोपनीयता सुरक्षा को लेकर बनी उच्चस्तरीय न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण समिति ने बच्चों की निजी जानकारियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधानों की वकालत की है। समिति ने सुझाव दिया है कि सूचनाओं का संग्रह करने वाले लोगों को ऐसे आंकड़ों का जिम्मेदार अभिभावक माना जाए और उन्हें बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकने वाली निजी सूचनाओं के प्रसंस्करण, ट्रेकिंग, लक्षित विज्ञापन देने आदि से रोका जाना चाहिये।

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समिति के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के हर व्यक्ति को सूचनाओं के संग्रहण के संदर्भ में बच्चा माना जाएगा। सूचना संरक्षण विधेयक के प्रस्तावित ड्राफ्ट में समिति ने कहा, ''जिम्मेदार अभिभावक माने गये व्यक्तियों को बच्चों पर केंद्रित विज्ञापन, उनके व्यवहार की निगरानी, प्रोफाइलिंग या ट्रैकिंग से रोका जाए तथा उन्हें निजी सूचनाओं के ऐसे प्रसंस्करण से भी रोका जाए जो बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हों।" समिति ने कहा कि यह नुकसान भौतिक या प्रतिष्ठा की हानि हो सकता है या पहचान का जोखिम भी हो सकता है।

समिति ने कहा कि प्रस्तावित भारतीय सूचना संरक्षण प्राधिकरण (डीपीएआई) के पास सूचनाओं के लिए जिम्मेदार ऐसे व्यक्तियों को अधिसूचित करने का अधिकार होना चाहिए जो बच्चों पर केंद्रित व्यावसायिक वेबसाइट या ऑनलाइन सेवाओं का परिचालन करते हों या अभिभावक तुल्य जिम्मेदार व्यक्ति के नाते भारी मात्रा में बच्चों की सूचनाओं का प्रसंस्करण करते हों।

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सूचनाओं को रखने वाले जिम्मेदार संस्थानों जिनकी बच्चों से संबंधित जानकारी तक पहुंच होती है, उनके मामले में समिति ने कहा है, ''समिति का मानना है कि बच्चों से जुड़े आंकड़ों के जिम्मेदार लोगों में वर्तमान में दो श्रेणियां हैं -- पहली जो प्राथमिक तौर पर बच्चों को सेवायें देते हैं- जैसे यू ट्यूब किड्स एप, हॉट व्हील्स, वाल्ट डिजनी आदि। दूसरे सामाजिक मीडिया सर्विसेजजैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि हैं। समिति ने बच्चों से जुड़ी जानकारी के आंकड़ों की सुरक्षा के लिये कड़े उपायों पर जोर दिया है।

समिति ने कहा है कि बच्चों के मामले में इस तरह का अलग उपाय इस बात को लेकर किया गया है कि बच्चे जो कुछ करते हैं उसके परिणाम के बारे में वह पूरी तरह आकलन नहीं कर पाते हैं। इसके साथ ही डिजिटल दुनिया के गैर-पारदर्शी डाटा संग्रह का तरीका और संस्तुति के बारे में जटिल फार्म होना प्रक्रिया को और जटिल बना देते हैं।- एजेंसी

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